Tuesday, May 21, 2024
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सजा ले ज़िंदगी की अंजुमन आहिस्ता आहिस्ता

कामता नाथ सिंह नसीराबाद,रायबरेली।
बज़्मे हयाते अदब किठावां के तत्वावधान में एक शेरी नशिस्त शब्बीर हैदर की सदारत और आलिम समर के निज़ामत में काशानए हयात में आयोजित की गई। मुंबई से आए हुए मोहम्मद माशूक़ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे ।नशिस्त की शुरुआत हिरा बानो ने नात पढ़कर की। पसंदीदा शेर पेशे ख़िदमत हैं:-
“हर तरफ़ अम्नो अमां हो काम कुछ ऐसे करें।”-शब्बीर हैदर
“सजा ले ज़िन्दगी की अंजुमन आहिस्ता- आहिस्ता”- क़ासिम हुनर
“रह्म की भीख भी नहीं देते,
आप तो लग रहे हैं हिटलर से।”- हाशिम उमर
“अख़्तर बना हुआ था मसीहा हमारा जो,
उसने हमारे ज़ख़्म को नासूर कर दिया।”- नफ़ीस अख़्तर
“हर जगह जिनकी क़द्रो क़ीमत है। हमने सिक्के ही ऐसे ढाले हैं।”- आलिम समर
“असलम तेरी निगाह में जंचता नहीं कोई”-असलम सलोनी
“जो ख़ाली रहे आप इल्मो हुनर से,
तो कोई न देखेगा अच्छी नज़र से।”-आमिर क़मर
“तदबीर से संवारा करो ज़ुल्फ़े ज़िन्दगी।”-शान सलोनी
“जो ख़ुद उल्टे हैं सीधे को भी वह उल्टा समझते हैं।”-यासिर नज़र
“हाय ज़माना” बूढ़े वालिद की ख़ातिर,
मज़दूरों के हाथ दवाई जाती है।”-अम्मार सहर
“ज़िक्र तेरा जो न होता तो मैं उकता जाता।”-तय्यार ज़फ़र
इसके बाद तौसीफ़ सलोनी ने ‘जज का जजमेंट’ शीर्षक पर एक बेहतरीन रचना सुनाई। मुख्य अतिथि माशूक़ ने भी अपने कलाम से नवाज़ा। इस मौक़े पर अमजद, मुस्तफ़ा,जमील ,नज्मेअसग़र, सेबू , नदीम,आलम, दिलशाद, हाफ़िज़ अमानुल्लाह, वक़ार, बिलाल,फ़हद ,शमीम,अमान वग़ैरह मौजूद रहे।

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Author: uploktantra

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