Tuesday, May 21, 2024
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मूर्ति कला का केंद्र बना बभन पुर गांव

कामतानाथ सिंह
नसीराबाद,रायबरेली।

किसी ज़माने में “गुरु जी” के नाम से मशहूर गुरुबख्श सिंह और उनके शिष्य सैकड़ों कुश्ती के धुरंधर पहलवानों के कारण कभी छोटा बनारस के नाम से प्रसिद्ध रायबरेली जिले के छतोह ब्लॉक का बभनपुर गांव, जहां इन दिनों बाबा परमान तिवारी धाम के कारण श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना हुआ है, वहीं यहां की मूर्तिकला भी धीरे-धीरे ख्याति अर्जित करती जा रही है। यहां चैत्र नवरात्रि तथा शारदीय नवरात्रि के लिए विशेष रूप से मूर्तियां तैयार की जाती हैं जिनमें प्रमुख रूप से आदिशक्ति दुर्गा भवानी, भगवान शंकर, श्री गणेश जी, बजरंगबली, श्री राम जानकी जी सहित उनके दरबारों के विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। इसके अतिरिक्त अग्रिम आदेशों पर अन्य मूर्तियों का निर्माण भी किया जाता है।मिट्टी से बनी कलात्मक कृतियां जहां लोगों का मन मोह लेती हैं, वहीं श्रद्धा भाव में वृद्धि भी करती हैं। नवरात्रि दुर्गा पूजा और दशहरा के लिए मिट्टी की मूर्तियां तैयार करने वाले नौजवान शुभम साहू पुत्र फूल चंद साहू इसी गांव के मूल निवासी हैं और और मिट्टी कला इनका पैतृक व्यवसाय भी नहीं है फिर भी फिर भी वह यह काम बड़ी रुचि और लगन से करते हैं।उन्होंने बताया कि नवरात्रि के लिए बहुत से ऑर्डर पहले से मिल जाते हैं। लगभग 3 महीने पहले से ही मूर्तियों का ढांचा बनाने का काम आरंभ किया जाता है जिसके लिए मिट्टी, पुवाल और बांस के फर्चे तैयार करने में घर के अन्य सदस्य भी सहायता करते हैं फिर भी कारीगरी अकेले ही अपने हाथ से करनी पड़ती है। बिना किसी सांचे के मूर्तियों का चेहरा और विभिन्न अंग बनाना, उन्हें आकर्षक रंगों से रंगना और उपयुक्त वस्त्र आभूषण आदि से सजाना कठिन काम होता है। यद्यपि महंगाई के कारण लागत अधिक आती है और अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता, इसके बावजूद कला में रुचि और देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा भाव के कारण यह कार्य किया जाता है।


देवी मां की कृपा से परिवार के पालन पोषण में भी इस कार्य से बड़ी मदद मिलती है।
विलक्षण प्रतिभा के धनी शुभम साहू की बनाई मूर्तियां बेहद आकर्षक होती हैं इसलिए कम उम्र में ही दूर-दूर तक उनके द्वारा बनाई गई देवी दुर्गा की मूर्तियों की मांग है। इस शारदीय नवरात्रि में भी अग्रिम आदेश पर इन्होंने लगभग 50 सेट मूर्तियां अलग अलग स्थानों पर स्थापित करने हेतु भेजी हैं। शुभम साहू ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण अधिक संख्या में मूर्तियां बना पाना संभव नहीं हो पाता।अगर सरकार ऐसे कलाकारों की मदद करे तो यह कला कुटीर उद्योग के रूप में विकसित हो सकती है। इससे कला के विकास के साथ ही आर्थिक विकास भी होगा और आत्म निर्भरता भी बढ़ेगी।

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Author: uploktantra

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