Saturday, May 25, 2024
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भूकंप का ज्ञान और विज्ञान

भूकंप आने पर घबराएं नहीं कुछ सावधानियां आवश्यक रूप से बरतें।

साधारण शब्दों में भूकंप का अर्थ पृथ्वी की कंपन से होता है। यह एक प्राकृतिक घटना है, जिसमें पृथ्वी के अंदर से ऊर्जा के निकलने के कारण तरंगें उत्पन्न होती हैं जो सभी दिशाओं में फैलकर पृथ्वी को कंपित करती हैं।

भूकंप से उत्पन्न तरगों को भूकंपीय तरगें कहा जाता है, जो पृथ्वी की सतह पर गति करती हैं तथा इन्हें ‘सिस्मोग्राफ’ (Seismographs) से मापा जाता है।

पृथ्वी की सतह के नीचे का स्थान जहाँ भूकंप का केंद्र स्थित होता है, हाइपोसेंटर (Hypocenter) कहलाता है और पृथ्वी की सतह के ऊपर स्थित वह स्थान जहाँ भूकंपीय तरगें सबसे पहले पहुँचती है अधिकेंद्र (Epicenter) कहलाता है।

धरती के अंदर कुल सात प्लेट्स हैं और ये प्लेट्स चलायमान रहती हैं। जहां प्लेट आपस में टकराती हैं उन्हें फाल्ट जोन कहते हैं। जब प्लेट टकराती हैं तो ऊर्जा बाहर निकलने की कोशिश करती है। इससे जो हलचल होती है वही भूकंप बन जाता है।

क्या आप जानते हैं ? 

भकंप से हर घर में पाई जाने वाली चींटी को भूकंप आने का आभास पहले ही हो जाता है. रिसर्च में पाया गया कि चींटी भूकंप की तीव्रता मापने वाले रिक्टर पैमाने पर 2.0 तक के झटके को महसूस कर लेती है, जिसको कभी इंसान महसूस नहीं कर सकता है ।

भूकंप के दौरान सावधानियां और बचाव

आप घर के बाहर हों तो जहां हों वहां से आप न हिलें। तथापि बिल्डिंग, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों तथा बिजली/टेलीफोन आदि की तारों आदि से दूर रहें। यदि आप किसी खुली जगह पर हों तो वहां तब तक रुके रहें जब तक कि भूकंप के झटके न रुक जाएं। सबसे बड़ा खतरा बिल्डिंग के बाहर, निकास द्वारों तथा इसकी बाहरी दीवारों के पास होता है।

भूकंप  के दौरान शांत रहें और दूसरों को भरोसा दिलाते रहें. भूकंप के दौरान इमारतों से दूर एक खुली जगह सबसे सुरक्षित जगह होती है. अगर आप घर के अंदर हैं, तो एक डेस्क, टेबल, बिस्तर, या दरवाजे के नीचे और भीतरी दीवारों और सीढ़ियों के नीचे कवर लें. कांच के दरवाजों, शीशे की खिड़कियों या बाहर के दरवाजों से दूर रहें. भगदड़ से बचने के लिए इमारत से बाहर जाने में जल्दबाजी न करें. अगर आप बाहर हैं, तो इमारतों और तारों से दूर हट जाएं. एक बार खुले में पहुंचने के बाद झटके बंद होने तक वहीं रहें. यदि आप किसी चलती गाड़ी में हैं, तो जितनी जल्दी हो सके रुकें और वाहन में ही रहें. सभी पालतू जानवरों को छोड़ दें ताकि वे बाहर भाग सकें. मोमबत्तियों, माचिस या अन्य आग के सामान का प्रयोग न करें. हर आग को बुझा दें.

भारत है कितना सुरक्षित ? 

भारत का लगभग 59 प्रतिशत भूभाग अलग-अलग तीव्रता के भूकंपों के प्रति संवेदनशील है। आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शहर और कस्बे जोन-5 में हैं और यहां सबसे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप का खतरा है। यहां तक कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भी जोन-4 में है, जो दूसरी सबसे ऊंची श्रेणी है।भारत में भूकंपीय ज़ोन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र (Regions that fall under the Earthquake (seismic) Zones in India)

ज़ोन-V में पूरे पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात के कच्छ के कुछ हिस्से, उत्तर बिहार और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्से शामिल हैं.

ज़ोन- IV में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के शेष भाग, केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से, गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्से, तथा पश्चिमी तट के पास महाराष्ट्र के छोटे हिस्से शामिल हैं.

ज़ोन-III में केरल, गोवा, लक्षद्वीप द्वीप समूह, उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल के शेष भाग, पंजाब के कुछ हिस्से, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड के कुछ हिस्से, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक शामिल हैं.

ज़ोन-II में देश के बचे शेष हिस्से शामिल हैं.

जोन-I : पश्चिमी मध्यप्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और उड़ीसा के हिस्से आते हैं। यहां भूकंप का सबसे कम खतरा है।सबसे सुरक्षित क्षेत्र हैं।

 

Alok Dwivedi
Author: Alok Dwivedi

ब्यूरो यूपी लोकतंत्र

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ब्यूरो यूपी लोकतंत्र
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