Saturday, May 25, 2024
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काशाने हयात किठावां में शेरी नशिस्त का आयोजन

कामता नाथ सिंह/इस्माइल खान
सलोन, रायबरेली। बज़्म-ए-हयात-ए- अदब के ज़ेरे एहतिमाम शेरी नशिस्त काशान ए हयात किठावां सलोन रायबरेली में आयोजित की गयी । जिसकी सदारत असलम सलोनी ने फ़रमाई और निज़ामत के फ़राएज़ हाशिम उमर ने अंजाम दिए। पसंदीदा अश्आर पेशे ख़िदमत हैं।
यासिर नज़र – “ख़ुदाए पाक की जो मोमिनों पर ख़ास रहमत है, मेरे आक़ा शहन्शाहे दोआलम की बदौलत है।” तैयार ज़फ़र – “पहले महफ़िल में ज़िक्रे ख़ुदा कीजिए , बाद में मुस्तफ़ा मुस्तफ़ा कीजिए।” शब्बीर हैदर – “इज़्ज़तें जिससे हों पामाल बहन बेटी की , हम ख़ुराफ़ात वह बरपा नहीं होने देंगे!” असलम सलोनी – “ख़ुश किसी सूरत न होने देंगे हम सय्याद को, पर वो नोचेगा मगर हम मुस्कुराए जाएंगे।” नफ़ीस अख़्तर – “तुझको नज़रों पे नहीं मैंने चढ़ाया लेकिन , ये भी सच है तुझे नज़रों से गिराया तो नहीं।” हाशिम उमर – “वो तो शहरग से भी क़रीब रहा, और हम उसकी दीद को तरसे।” आमिर क़मर – “दबदबा फ़िरक़ा परस्तों का यहां है वरना , कल भी थी आज भी है गंगो जमन की ख़ुशबू।” अम्मार सहर – “एक सजदा ज़िन्दगी का बहुत है मेरे अज़ीज़ , गर उसकी बारगाह में मंज़ूर हो गया।” क़ासिम हुनर – “सख़्त लहजे में ग़रीबों से करे है बातें , ये किसी साहिबे दौलत का भतीजा तो नहीं।” इसके अलावा आफ़ताब ज़िया, हिरा ने भी कलाम से नवाज़ा । इस मौक़े पर अख़लाक़ , नौशाद, दिलशाद, सेबू ,रहमत अली, अब्दुल ख़ालिक़, साजिद, नजम असग़र, ज़हीर के अलावा तमाम लोग मौजूद रहे । आख़िर में नशिस्त के कन्वीनर नफ़ीस अख़्तर सलोनी ने शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया।

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Author: uploktantra

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