Saturday, May 25, 2024
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परशदेपुर-गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आना…

परशदेपुर l

परशदेपुर में गणेश चतुर्थी पर विराजे गणपति बप्पा की सात दिन बाद विदाई, इस उम्मीद के साथ कि गणपति बप्पा अगले बरस तू जल्दी आना। गणपति विसर्जन की परशदेपुर में धूम दिखाई दी। परशदेपुर मे भारी संख्या में श्रद्धालु बप्पा का विसर्जन करने के लिए पहुंचे। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे लगाए।
उधर, सुरक्षा के लिहाज से सईनदी के घाट पर चौकी प्रभारी सुनील वर्मा अपने दल बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मौजूद रहे।

नगर पंचायत परशदेपुर के उत्तरी क्षोर वार्ड नंबर एक मे कौशल परिवार के पंडाल में विराजे भगवान गणेश की प्रतिमा को सात दिवस पूरा होने पर सई नदी मे विसर्जित किया गया।
सोमवार को नगर पंचायत परशदेपुर की सड़को पर गाजे बाजे के साथ सभी भक्त नाचते गाते रहे जिससे पूरा शहर भगवान गणेश की भक्ति में सरोबार हो गया। श्रद्धालु अबीर गुलाल की बौछार कर ,गणेश आरती करते और भजनों पर थिरकते आगे बढ़ते रहे। बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे भी शामिल हुए। शोभायात्रा को देखने के लिए लोगाें की भीड़ सड़कों पर व घरों की छतों पर भी लगी रही। इस दौरान श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरया…के जयकारे भी लगाते रहे।
इस अवसर पर आचार्य धर्मेश जी महाराज,राजेश कौशल उर्फ राजू, गुलाब चंद्र वैश्य, सतीश कौशल, महेंद्र माही, भाजपा बूथ अध्यक्ष अखिलेश सभासद प्रभाकर मिश्रा (चुन्ना मिश्रा),शैलेंद्र साहू, हरिश्चंद्र, सुभाष वैश्य, अमर कौशल, रामू कौशल,गिरजेश कौशल, सभासद आशु जायसवाल, चेतन कौशल आदि मौजूद रहे।

 

गणेश विसर्जन पौराणिक कथा

माना जाता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति को जल में विसर्जित कर दिया जाता है क्योंकि वो जल तत्व के अधिपति हैं. पुराणों के अनुसार, वेद व्यास जी भगवान गणेश को कथा सुनाते थे और बप्पा उसे लिखते थे. कथा सुनाते समय वेद व्यास जी ने अपने नेत्र बंद कर लिए. वो 10 दिन तक कथा सुनाते गए और बप्पा उसे लिखते गए. लेकिन जब दस दिन बाद वेद व्यास जी ने अपने नेत्र खोले तो देखा कि गणपति जी के शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया था. वेद व्यास जी ने उनका शरीर ठंडा करने के लिए ही उन्हें जल में डुबा दिया जिससे उनका शरीर ठंडा हो गया. कहा जाता है कि उसी समय से यह मान्यता चली आ रही है कि गणेश जी को शीतल करने के लिए ही गणेश विसर्जन किया जाता है.

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भगवान गणेश जी की दक्षिण में अपने भाई कार्तिकेय के यहां कुछ दिनों के लिए रहने गए और वहां सबका मन मोह लिया. फिर 10 दिन बाद वह वहां से ​अपने धाम के लिए विदा हुए और इस दौरान भगवान कार्तिकेय समेत सभी लोग काफी भावुक हुए और गणपति को अगले साल फिर से आने का न्योता दिया. कहते हैं कि तभी तक गणेश विसर्जन का पर्व मनाया जाता है और भगवान गणेश से प्रार्थना की जाती है कि वह अगले साल फिर से सुख-समृद्धि और खुशियों के साथ हमारे घर पधारें.

 

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Author: uploktantra

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