Tuesday, May 21, 2024
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शहीदी दिवस पर याद किए गए परमवीर अब्दुल हमीद

कामता नाथ सिंह
नसीराबाद,रायबरेली। सन 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान खेमकरण सेक्टर में अभूतपूर्व पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान के अभेद्य पैटन टैंकों को कागजी खिलौने की तरह उड़ा देने वाले अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद के 58 वें बलिदान दिवस पर देशवासियों ने उन्हें बड़ी शिद्दत से याद किया। दरअसल वह युद्ध अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए गए पैटन टैंकों जैसे अपराजेय हथियारों और भारत के वीर जवानों के फौलादी इरादों के बीच लड़ा जा रहा था। जिस पैटन टैंक को पूरा विश्व अजेय समझ रहा था उसे मजबूत इरादों और देशभक्ति के जज्बे से भरपूर वीर अब्दुल हमीद ने साधारण राइफल से तोड़कर सारी दुनियां को चौंका दिया था। उन्होंने एक नहीं, आठ पैटन टैंक तोड़कर युद्ध का रुख बदल दिया था और पाकिस्तानी सेना को छठी का दूध याद दिला दिया था। 01 जुलाई 1933 को गाजीपुर जिले के धरमपुर गांव में जन्मे इस वीर ने 10 सितंबर 1965 को मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना अनुकरणीय बलिदान दिया था। इसके लिए कृतज्ञ राष्ट्र ने उन्हें वीरता का सर्वोच्च पदक परमवीर चक्र प्रदान किया था। उनकी शहादत की याद में छतोह ब्लॉक के अशरफपुर गांव में स्थित मदरसा शहीद वीर अब्दुल हमीद अकादमी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें सैकड़ो लोगों ने भारत माता के अमर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करके स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया। इस अवसर पर जिला अल्पसंख्यक कांग्रेस अमेठी के अध्यक्ष सैयद हुसैन अशरफ ने कहा कि अमर शहीद अब्दुल हमीद से अपनी मातृभूमि पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा मिलती है। हम इसी मुल्क की मिट्टी से बने हैं और जरूरत पड़ने पर हमें अपने मुल्क पर सब कुछ अर्पित कर देना है।
इस पावन अवसर पर एडवोकेट मंजूर हसन, काजी इमाम सैयद, मोहम्मद शफीक, रामधनी पासी, मास्टर अनिल कुमार आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में प्रिंसिपल तैयबा बानो ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।

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Author: uploktantra

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